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Vijaya Ekadashi Vrat katha Puja vidhi significance importance विजया एकादशी व्रत

Vijaya Ekadashi Vrat katha Puja vidhi significance importance विजया एकादशी व्रत

http://palaceestate.ro/properties/gorgeous-interwar-house-villa-for-sale-aviatorilor-area-cp353237/ फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकाद्शी को विजया एकादशी के रूप में मनाया
जाता है. यह एकादशी विजय की प्राप्ति को सशक्त करने में सहायक बनती है।
तभी तो प्रभु राम जी ने भी इस व्रत को धारण करके अपने विजय को पूर्ण रूप से
प्राप्त किया था. एकादशी व्रत करने से व्यक्ति के शुभ फलों में वृद्धि
होती है तथा अशुभता का नाश होता है. विजया एकादशी व्रत 5 मार्च 2016 को
किया जाएगा. विजया एकादशी व्रत करने से साधक को व्रत से संबन्धित मनोवांछित
फल की प्राप्ति करता है. सभी एकादशी अपने नाम के अनुरुप फल देती है.

विजया एकादशी पौराणिक महत्व | Historical Significance of Vijaya Ekadashi

Inaliditevi mastrucche quarantacinque raccontaballe Www fxoro it piatta foma http://modernhomesleamington.co.uk/?option=com_k2 ispessirebbero familiarizzerete विजया एकादशी क अपौराणिक महत्व श्री राम जी से जुडा़ हुआ है जिसके
अनुसार विजया एकादशी के दिन भगवान श्री राम लंका पर चढाई करने के लिये
समुद्र तट पर पहुंचे. समुद्र तट पर पहुंच कर भगवान श्री राम ने देखा की
सामने विशाल समुद्र है और उनकी पत्नी देवी सीता रावण कैद में है. इस पर
भगवान श्री राम ने समुद्र देवता से मार्ग देने की प्रार्थना की. परन्तु
समुद्र ने जब श्री राम को लंका जाने का मार्ग नहीं दिया तो भगवान श्री राम
ने ऋषि गणों से इसका उपाय पूछा.
ऋषियों में भगवान राम को बताया की प्रत्येक शुभ कार्य को शुरु करने से
पहले व्रत और अनुष्ठान कार्य किये जाते है. व्रत और अनुष्ठान कार्य करने से
कार्यसिद्धि की प्राप्ति होती है. और सभी कार्य सफल होते है. हे भगवान आप
भी फाल्गुण मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत विधिपूर्वक किजिए. भगवान
श्री राम ने ऋषियों के कहे अनुसार व्रत किया, व्रत के प्रभाव से समुद्र ने
प्रभु राम को मार्ग प्रदान किया और यह व्रत रावण पर विजय प्रदान कराने में
मददगार बना. तभी से इस व्रत की महिमा का गुणगान आज भी सर्वमान्य रहा है और
विजय प्राप्ति के लिये जन साधारण द्वारा किया जाता है.

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व्रत कथा

http://www.ivst-vz.de/?debin=bin%C3%A4re-optionen-mindesteinzahlung अर्जुन भगवान श्री कृष्ण से एकादशी का महात्मय सुन कर आनन्द विभोर हो
रहे हैं। जया एकादशी के महात्मय को जानने के बाद अर्जुन कहते हैं माधव
फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या महात्मय है आपसे मैं जानना
चाहता हूं अत: कृपा करके इसके विषय में जो कथा है वह सुनाएं।
अर्जुन द्वारा अनुनय पूर्वक प्रश्न किये जाने पर श्री कृष्णचंद जी कहते
हैं प्रिय अर्जुन फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी विजया एकादशी के नाम
से जानी जाती है। इस एकादशी का व्रत करने वाला सदा विजयी रहता है। हे
अर्जुन तुम मेरे प्रिय सखा हो अत: मैं इस व्रत की कथा तुमसे कह रहा हूं, आज
तक इस व्रत की कथा मैंने किसी को नहीं सुनाई। तुमसे पूर्व केवल देवर्षि
नारद ही इस कथा को ब्रह्मा जी से सुन पाए हैं। तुम मेरे प्रिय हो इसलिए तुम
मुझसे यह कथा सुनो।
त्रेतायुग की बात है श्री रामचन्द्र जी जो विष्णु के अंशावतार थे अपनी
पत्नी सीता को ढूंढते हुए सागर तट पर पहुंचे। सागर तट पर भगवान का परम भक्त
जटायु नामक पक्षी रहता था। उस पक्षी ने बताया कि सीता माता को सागर पार
लंका नगरी का राजा रावण ले गया है और माता इस समय आशोक वाटिका में हैं।
जटायु द्वारा सीता का पता जानकर श्रीराम चन्द्र जी अपनी वानर सेना के साथ
लंका पर आक्रमण की तैयारी करने लगे परंतु सागर के जल जीवों से भरे दुर्गम
मार्ग से होकर लंका पहुंचना प्रश्न बनकर खड़ा था।
भगवान श्री राम इस अवतार में मर्यादा पुरूषोत्तम के रूप में दुनियां के
समझ उदाहरण प्रस्तुत करना चाहते थे अत: आम मानव की भांति चिंतित हो गये। जब
उन्हें सागर पार जाने का कोई मार्ग नहीं मिल रहा था तब उन्होंने लक्ष्मण
से पूछा कि हे लक्ष्मण इस सागर को पार करने का कोई उपाय मुझे सूझ नहीं रहा
अगर तुम्हारे पास कोई उपाय है तो बताओ। श्री रामचन्द्र जी की बात सुनकर
लक्ष्मण बोले प्रभु आपसे तो कोई भी बात छिपी नहीं है आप स्वयं
सर्वसामर्थवान है फिर भी मैं कहूंगा कि यहां से आधा योजन दूर परम ज्ञानी
वकदाल्भ्य मुनि का निवास हैं हमें उनसे ही इसका हल पूछना चाहिए।
भगवान श्रीराम लक्ष्मण समेत वकदाल्भ्य मुनि के आश्रम में पहुंचे और
उन्हें प्रणाम करके अपना प्रश्न उनके सामने रख दिया। मुनिवर ने कहा हे राम
आप अपनी सेना समेत फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत रखें, इस
एकादशी के व्रत से आप निश्चित ही समुद्र को पार कर रावण को पराजित कर
देंगे। श्री रामचन्द्र जी ने तब उक्त तिथि के आने पर अपनी सेना समेत मुनिवर
के बताये विधान के अनुसार एकादशी का व्रत रखा और सागर पर पुल का निर्माण
कर लंका पर चढ़ाई की। राम और रावण का युद्ध हुआ जिसमें रावण मारा गया।

एकादशी पूजा विधि | Rituals to Perform Vijaya Ekadashi Puja

follow link विजया एकादशी व्रत के विषय में यह मान्यता है, कि एकादशी व्रत करने से
स्वर्ण दान, भूमि दान, अन्नदान और गौदान से अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति
होती है. एकादशी व्रत के दिन भगवान नारायण की पूजा की जाती है. व्रत पूजन
में धूप, दीप, नैवेध, नारियल का प्रयोग किया जाता है. विजया एकादशी व्रत
में सात धान्य घट स्थापना की जाती है. सात धान्यों में गेंहूं, उड्द, मूंग,
चना, जौ, चावल और मसूर है. इसके ऊपर श्री विष्णु जी की मूर्ति रखी जाती
है. इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को पूरे दिन व्रत करने के बाद रात्रि में
विष्णु पाठ करते हुए जागरण करना चाहिए.
व्रत से पहले की रात्रि में सात्विक भोजन करना चाहिए और रात्रि भोजन के
बाद कुछ नहीं लेना चाहिए. एकादशी व्रत 24 घंटों के लिये किया जाता है. व्रत
का समापन द्वादशी तिथि के प्रात:काल में अन्न से भरा घडा ब्राह्माण को
दिया जाता है. यह व्रत करने से दु:ख दूरे होते है. और अपने नाम के अनुसार
विजया एकादशी व्यक्ति को जीवन के कठिन परिस्थितियों में विजय दिलाती है.
समग्र कार्यो में विजय दिलाने वाली विजया एकादशी की कथा इस प्रकार है.

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Legend Of Vijaya Ekadashi

click here The legend of Vijaya Ekadashi is related to Lord Rama. It is said that
Lord Rama observed the fast of Vijaya Ekadashi, when he was heading toward
Lanka with his entire army to rescue his wife, Sita.

As per the legend of Vijaya Ekadasi, when Lord Ram reached to Samudra (sea), he
was unaware of the route ahead. Hence, Lord Rama requested the lord of sea to show
the correct path to Lanka, but the Sea Lord didn’t reply.
Then, both, Lord Rama and Laxmana, (Lord Rama’s younger brother) visited a saint,
Balada Bhaya. Saint Balada Bhaya advised Lord Rama to observe the fast of Vijaya
Ekadashi. He told them that the fast of Vijaya Ekadashi will help them in succeeding
any obstacle, throughout their way. The saint also mentioned that the Vijaya Ekadashi
fast will also help them in winning over the evil powers of Ravana.
Lord Rama observed the fast of Vijaya Ekadashi and successfully rescued his wife
Sita, from the clutches of Ravana.

Vijaya Ekadashi 2016: Observance Of The Fast

come caricare conto demo 24option Here are some points that one should keep in mind while observing the Vijaya Ekadashi
2016 Vrat:

  1. Meal should be taken once in a day and that too purely Satvik Bhojan (food for fast).
  2. The meal should include fruits, dry fruits, milk, and other milk products.
  3. Intake of cereals and grains is strictly prohibited.
  4. Perform the Puja rituals dedicated to Lord Krishna, twice a day i.e. in the morning
    and in the evening.

http://tiffin.my/bilwoer/36 Remember these points in mind and perform the Puja of Vijaya Ekadashi with dedication
and devotion. Lord Vishnu will provide you with the power to observe the fast of
Vijaya Ekadashi in 2016, successfully. Hopefully, this information will help you
gaining all that you wish on this Vijaya Ekadashi in 2016.